Tuesday, 28 July 2020

Substance Abuse

कक्षा 11 का पहला दिन और पहली क्लास। इस कक्षा में सभी बच्चों के मन में प्रसन्नता की लहर उठ रही है जैसे "कि वसंत ऋतु में पीले सागर में हवा की लहर उठ रही हो।" ये प्रसन्नता का कारण है कि कक्षा 10 पास कर चुके हैं, सभी बच्चे आपस में इस सफलता के बारे में बात-चीत कर रहे हैं, कि किस तरह पढ़ाई करके अपनी सफलता प्राप्त किए हैं।

जैसा की विधि का विधान है कि कक्षा के सभी टॉपरो एक Group बना कर चलते हैं और इस कक्षा के टावरों का Group है जिसमें प्रभास, वैभव, और प्रसून हैं।

और इस टॉपरो के Group में कुछ इस प्रकार की बातचीत चल रही है जिससे यह पता चलता है कि ये लोग अपने जीवन को कोई और मार्ग पर धकेलने की योजना बना रहे हैं इस Group में प्रत्येक बच्चा अपना विचार इन सबके सम्मुख प्रस्तुत करते हैं। अभी तक इस Group में तो मजाक मस्ती चल रही थी।     

तभी अचानक प्रभास इस Group को एक नए मोड़ देते हुए बोला-  यार हम लोग काफी ज्यादा पढ़ाई किए हैं और बहुत कड़ी मेहनत से इस मुकाम पर पहुंचे हैं। और अपने विद्यालय का नाम रोशन किए हैं।

वैभव ने सहमति जताते हुए कहा-  हां यार तुम सही कह रहे हो भाई, हम लोग तो पढ़ाई में तो इतना खो गए थे जैसे कि "कोई पक्षी सारी दुनिया को भुला कर पुष्प के मकरंद रस चूसने में व्यस्त हो, ठीक इसी प्रकार हम लोग पढ़ाई किए थे।" 

तभी अचानक प्रसून वैभव की अगली बात रोक कर खिंचाई करते हुए हास्य रस को छिड़ककर बोला-  भाई, तुम तो हिंदी में अपना झंडा गाड़ दिया पर हम लोगों को अपना हिंदी वाला झंडा मत दिखाओ। और फिर खुद हंसते हुए बोला-  भाई ये सब तो सही हैं लेकिन यार हम लोग तो अपना जीवन तो पूरा दमघोटू बना कर रख दिए हैं। यार मेरी मानो तो कुछ मजाक - मस्ती हो जाए क्योंकि First Year is Rest Year.

प्रसून की बात खत्म होते ही प्रभास झट से सीट पर हाथ पटक कर क्लास के सभी बच्चों का ध्यान आकर्षित करते हुए बोला-  भाई, Rest Year कुछ मजाक -  मस्ती। फिर अगले पल अपनी आवाज को सीमित करते हुए बोला भाई कुछ अलग मजाक मस्ती करनी हो तो हमसे मिलो।

वैभव थोड़ा हंसमुख सा होकर बोला-  भाई, तू ज्यादा भोकाल मत दिखा।

प्रभास-  अच्छा ठीक है।

ये बताओ कि मस्ती किस प्रकार का हो जैसे कि घूमने टहलने, स्कूल बंक मारना, दारु - शराब, गोमती-सिगरेट, पान-पुकार किस तरह का चाहिए हमारे पास सब है।

वैभव हंसते हुए बोला-  यार, यार तू तो होटल की मीनू कार्ड की तरह शुरू हो गया यार कुछ ऐसा बताओ जिसमें हम लोगों को कहीं जाना ना पड़े।

वैभव सब को संभालते हुए बोला-  यार ऐसी परिस्थिति में दारु - शराब एवं सिगरेट जैसी नशीली पदार्थ हमारे सेहत के लिए बहुत हानिकारक होगा। और हां यार हम लोग तो ये भी पढ़े थे कि दारु शराब हमारे सेहत के लिए हानिकारक होता है यहां तक कि जानलेवा भी होता है, इसका क्या होगा। 

प्रभास-  भक्क पगलागए हो का बे,

हमारे उधर तो बहुत से लोग इन सब का सेवन करते हैं और उनको अभी तक कुछ नहीं हुआ और तो और वह अपना मस्त जीवन जीते हैं। और उनको ना कोई चीज की टेंशन और ना ही किसी चीज की रोकथाम जब चाहे जहां चाहे घूमते टहलते हैं। 

प्रसून-  भाई, हम लोगों से शराब-वराब नहीं पी जाएगा।

प्रभास-  अबे यार, शराब कौन पीने को बोल रहा है हम लोग के पास और भी विकल्प है ना। और यह आखिरी ऑप्शन है सिगरेट, क्या बोलते हैं।

वैभव-  यार प्रभास ये बताओ कि तुम इन सब के बारे में इतनी जानकारी कैसे पाए और हां सिगरेट कहां से लाओगे?

प्रभास-  देख भाई, हमारे घर के आस-पास बहुत से लोग ऐसे हैं जो इन सब का सेवन करते हैं और मैं अपने घर के बालकनी से इन सब को सेवन करते हुए देखता हूं। इसीलिए मैं इन सब के बारे में जानता हूं और रही बात सिगरेट की, सिगरेट तो हमारे पिताजी खुद पीते हैं।

Group के सभी जन सहमति जताते हुए एक स्वर में बोलते हैं Chal Ok Done. फिर क्या फिर क्या होना था अगले दिन क्लास में 3 सिगरेट लाया गया और फिर Interval में Group के तीनो लोग Toilet Room के पीछे अपने जीवन को एक मोड़ दिए। इस मोड़ के आगे तो कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था ऐसा लग रहा था कि सीधा खाई है। और Group के सभी सदस्य इसी रास्ते पर अपना रुख मोड़ दिया।

1 सप्ताह चलने के बाद ये अपना यूं ही बढ़ाते गए और कक्षा के सभी विद्यार्थियों से धीरे-धीरे अपना नाता तोड़ते गए।

एक पखवारे के बाद कक्षा में एक नया विद्यार्थी दाखिला लिया जो अपने विद्यालय का टॉपर था और साथ ही साथ बहुत अनुशासित  बच्चा था। इसके माता-पिता ने कहा था कि "सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना और अच्छे लोगों के साथ उठना बैठना।

"पहली ही क्लास में बच्चे का Introduction हुआ सारे कक्षा वालों को पता चल गया कि ये अपने विद्यालय का टॉपर था। फिर इसने कक्षा के सभी छात्रों से हाथ मिलाकर सबका नाम पूछा और फिर माता-पिता के अनुसार टॉपरों का Group join कर लिया जो अब तक बिगड़ चुका था और कुछ ही दिनों में Group के साथ पूरा हिल मिल गया।

इस Group के नए मेंबर सौरभ ने इन सबको सिगरेट पीते हुए देखा तो इन सब को समझाने लगा और बोला-  भाई, सिगरेट पीना अच्छी बात नहीं है, "सिगरेट को तुम लोग नहीं पी रहे बल्कि वह तुमको पी रहा" और यार तुम लोग तो पढ़े-लिखे हो इस डिब्बे पर साफ-साफ लिखा है कि सिगरेट जानलेवा है इसके बावजूद भी।

तभी प्रभास सिगरेट का धुआं बाहर निकालते हुए बोला-  अबे चुप, पोगा पंडित। तुमको नहीं पीना हो तो तुम मत पियो। 

ऐसा दो-तीन दिन चलता रहा और फिर अगले दिन Group के लोग सौरभ को सिगरेट टेस्ट करने के लिए बोले पर सौरभ ने मना कर दिया। ऐसा 1 सप्ताह तक चलता रहा और फिर अंत में सौरभ भी खाई वाले मोड की तरफ अपना रुख मोड़ दिया।

फिर क्या सौरभ के लिए भी एक सिगरेट आने लगी। फिर ऐसे करते-करते हैं इस Group को सिगरेट का लत लग गया।

अब ये लोग सिगरेट के बिना नहीं रह सकते है। अपने परिवार और स्कूल वालों से चुप-चुप कर पीते है। और तो और इन्होंने एक स्थान भी चुन लिया है और जब भी पीना हो तो एक ही कॉल में वहां मिलते है। अब तो सौरभ भी बड़े चाव से सिगरेट का धुआं लेता है इस अप्रिय गंध अब उसको प्रिय लगने लगी है, और अब Group का मांग हुआ कि सिगरेट से ऊपर चलते हैं शराब पर। Group के सभी सदस्यों का अनुमति मिलने में एक महीना लग गया। शराब की लत लगते ही ये सब लोग अपने परिवार को भ्रम में रखने लगे। पढ़ाई की बोली देखकर पूरी रात-रात तक गायब रहते थे।

और जब माता-पिता पूछते बेटा-  तुम्हारी आंखें लाल क्यों हो गई है?

बेटा-  पूरी रात पढ़ाई करने के कारण ये ऐसा हो गया है।

अब तो इस Group की स्थिति इस प्रकार हो गई है जैसे कि "हीरे का खान कोयले में बदल गया हो"

"पहले तो ये लोग क्लास के शान मान माने जाते थे, लेकिन अब तो दारु सिगरेट का शान बढ़ा रहे हैं।।

पहले तो क्लास के पहली सीट पर मिलते थे, लेकिन अब तो कई दिनों तक अपना चेहरा नहीं दिखाते हैं।।

पहले तो ये लोग Class, Library, Lab  इन सब स्थानों पर मिलते थे, लेकिन अब गली, नुक्कड़, अंग्रेजी शराब पर मिलते हैं।।

इन बच्चों कब पहले भारत देश इंतजार कर रहा था, लेकिन अब पुलिस कर रही है।।"

ऐसे ही किसी तरह यह खबर हवा में उड़ते-उड़ते हुए सौरभ के पापा के पास पहुंचा। और सौरभ के पापा गुंडों को पालने वाले आदमी थे। यह खबर सुनते ही, वो सोग के सागर में डूब गए। सोग के सागर से बाहर आने के बाद, Group के सदस्यों के सभी घरों में यह खबर पहुंचाई गई।

फिर क्या जब प्रभास वैभव प्रसून और सौरभ को पता चला तो ये लोगों ने शराब को चुनते हुए शहर को छोड़ने का निर्णय किया। और इसी रात को यह लोग रात का अंतिम खचाड़ा बस पकड़ लिए। बस में सीट ना होने के कारण बस ड्राइवर ने अपने पास इंजन वाले सीट पर बैठा लिया जिसके चलते ये लोग बस ड्राइवर से दोस्ती कर ली और दोस्ती-यारी मे उनको पिला दिया।

इधर इन चारों के परिवार वाले बेचैन सा होकर इन सब को ढूंढने में लगे हुए हैं, जैसे कि "किसी पक्षी का अंडा सर्प अपना भोजन बना लिया हो और यह पक्षी इधर-उधर भटक कर उसके वियोग में मर रहे है।

इन सभी के घरों का एक ही हाल है घर के बाहर जब भी कोई आता है तो यह लगता है कि मेरा बेटा आया है।

और फिर तभी अचानक मेरा छोटा भाई T.V. खोलता है और गलती से News Channel लगा देता है और इसी News के साथ हम चारों के परिवार की उम्मीद भी टूट जाती है।


-Rohit Kumar Prajapati  (JNV Shrawasti) 
 Class-9th

Saturday, 25 July 2020

वक़्त के नोक पर मेरे ह्रदय का तस्वीर

23 july 2017


आज
का दिन मेरे जीवन के सबसे कठिनतम दिनों में से एक था। इसी मनहूस दिन में मैं अपने प्राणों से अलग हो गया था। इसी दिन के बाद में मैंने कई आत्मीय और मानवीय भावों को बदलते हुए देखा है।

मैंने बहुत सारे उत्पीड़न को सहते हुए जीवन की "एक नई कसौटी के लिए निश्चल एवं असहाय मन से कदम रखा है" मेरी स्थिति कुछ इस प्रकार से हो गई है जैसे "एक चिड़िया सारी पीड़ाओं को सहकर धूप हो या बरसात या कोई भी प्रतिकूल घड़ियों में भी अपने आप की चिंता करते हुए एक-एक तिनका जुटाकर अंडे देने के लिए घोंसला बनाती है, और बड़े वात्सल्य भाव से सोचती है कि मैं अपने आने वाले बच्चों को हर प्रकार की तकलीफों से दूर रखूंगी और कुछ ही दिनों बाद एक सर्प अंडों को अपना भोजन बना लेता है और वह बेचारी असहाय चिड़िया अपनी आंखों से उस दुर्घटना द्वारा उत्सर्जित उस पीड़ा को देखती रहती है और सहती है।"

आज इन सभी उत्पीड़नो को याद कर मैं उन पलों को याद करता हूं जो शायद ऐसे हो गए हैं जैसे "एक कमल को अपने पत्ते पर लगे उन शबनम की चाहत या जैसे हंस को सरोवर में मोतियों की चाहत।"

मुझे याद है वह मुझसे हमेशा कहा करती थी कि मेरे साथ भी थोड़ी देर बैठ जाओ मेरे पास भी थोड़ी देर वक्त बिता लो और मैं मूर्ख अभागा उन जीवन के सबसे अच्छे पलों को भी बिताने के लिए कतरा रहा था।

हां मैं,

"अपने मां के बारे में ही बात कर रहा हूं" और आज उन पलों को पाने के लिए ऐसी तड़प ऐसे बेचैनी है जैसे "एक सुगम नदी एक महासागर में मिलने के लिए बेचैन रहती है, और जैसे एक चकोर चंद्रमा के उस शीतल किरण को पाने के लिए बेचैन रहता है, या एक कौवा अपनी प्रशंसा के लिए बेचैन रहता है"

पर मैं शायद जानता हूं कि वह पल मुझे कभी नहीं मिलेगा मैं उस दिन से अनजान था कि मेरे अच्छे समय शायद 'उस पथ पर भटक गए हैं जहां सिर्फ बंजर और कांटो के सिवा कुछ नहीं होगा।'

                               दिनांक 17 जुलाई 2017

आज तक इस दिन को नहीं भूला मैं बाहर से आया था और मेरी मां अपने बचपन के दिनों को तस्वीर के माध्यम से झांकने की कोशिश कर रही थी जो उनसे बहुत ज्यादा दूर जाने वाली थी शायद उनको पता था मेरा एक सुहाना सफर कुछ दिनों में समाप्त हो जाएगा। मैं उनकी आंखों में वह पीड़ा आंसू के रूप में देखा था लेकिन मैं उनसे कुछ पूछ ना सका था और मैंने इस बात को हंसकर टाल दिया वह मेरी उनसे आखिरी वार्तालाप थी। आज 3 साल का एक कठिन सफर बीत चुका है मुझे जीवन एवं अपनों का एक अलग नजरिया देखने को मिला है मैंने इन 3 सालों में लालच स्वार्थ, दिखावा, प्रेम, को भलीभांति समझ लिया है। मुझे पता नहीं कि जीवन के कौन सा रहस्य को जानने का अवसर प्राप्त होने वाला है। सच में मां ईश्वर का दिया हुआ अनमोल तोहफा है यह वह तोहफा जिसकी कीमत पास ना होने पर सहज ही पता लगाया जा सकता है आज मुझे बहुत सारे उत्पीड़नो को अपने हृदय में अकेलेपन के रूप में बसाना पड़ा है जो कि शायद अगर वह होती तो ना करना पड़ता है। आज मैं सभी यादों को अपने खाली समय में सहेजने की कोशिश कर रहा हूं मैं सिर्फ इतनी प्रार्थना करना चाहूंगा कि "सौभाग्य है जिसके पास मां है"

क्योंकि,

                                उनका प्रेम जीवन का आधार है,

                        जीवन का सार है,

                        स्वर्ग रुपी संसार है,

                        अपार ममता का भंडार है।

उनका प्रेम है जो मानव को मानवता का आकार देती है                                    


Tuesday, 21 July 2020

A Glimpse of Nature

हम उनको उनकी उजरत भी नहीं देते हैं| और वह अपना काम करती रहती हैं| सभी के घरों में जाकर उनको अपनी प्यारी सी किलकारी से हम किसानों के कर्णपालि सहलाकर निंद्रा को भगाती हैं| और ये अपने अंडे-बच्चे को छोड़कर इस निस्वार्थ कार्य को अंजाम देती है| 

''प्रकृति की सुंदरता को इस प्रकार बढाती हैं, जैसे कि एक बिंदी मां के माथे पर मां की सुंदरता को बढ़ाती हैं'' प्राकृतिक एक ऐसी किताब है जिसमें सब कुछ समाहित है जैसे कि भगोलिय शास्त्र से लेकर खगोलीय शास्त्र तक की अथाह ज्ञान है| इस प्राकृतिक के सागर में हिलोरे मारने का साहस तो सिर्फ जंगल के जीव-जंतु में हैं| पर ''जो प्राकृत मां के गोद में जो सहज सुख है वह पूरे संसार में कहीं नहीं''|

मैं क्षमा चाहता हूं इन दो लाइनों, के लिए वैसे मैं मां के गोद का अवहेलना नहीं कर रहा हूं मैं तो मां के गोद से वंचित जन को प्राकृत मां के गोद से परिचय करा रहा हूं| इन सब के विपरीत इस आधुनिक युग में शहरी बाबू प्राकृत से नाता तोड़ने में लगे हैं| और  ''साथ ही साथ ''प्राकृतिक लेखक का कलम छीन कर अपने कार्य रूपी धनुष के चाप पर चढ़ाकर प्राकृत मां का हृदय छन्नी कर रहे हैं''| इन स्वार्थी शहरी को प्राकृत मां के गोद के बारे में नहीं पता है।
अगर हमको जीवन के इस दौर में प्रतिभाग नहीं करना हो तो मैं प्राकृत मां के गोद में ही अपना सारा जीवन व्यतीत करूँगा। और ऐसा लगता है कि शहरी बाबू अपना पैतृक ज्ञान को भुला चुके हैं कि अगर हम प्राकृत मां के सम्पर्क में 
रहे तो''हमारा जीवन जून की चिलचिलाती धूप से वसंत का सुहाना सफर सा हो जाता है''। ये शहरी बाबू लोग तो यह भी जानने की अभिलासा नहीं रखते हैं कि ''मैं आज जिस स्तर पर हूं उसका उत्तरदायित्व कौन है, अगर प्रत्यक्ष रूप से देखा जाए तो हमारी मां और अप्रत्यक्ष रूप से हमारी प्रकृति मां''। 
''हमको यह कहने में ऊर्जा का अनुभव हो रहा है कि मैं इन स्वार्थी शहरी बाबू की श्रेणी में होने के बावजूद भी हमको प्राकृत की फुलझड़ी  जैसे पखेरू के सौरभ को पसंद करता हूं 'और हमको  ऋतु राज वसंत के समय का पीला सागर, और सुबह के समय गांव में भगवान भास्कर की लालिमा के साथ फसलों का लहराना और उसकी खुशबू जो हमारी मस्तिक के लिए साबुन के भांति कार्य करती है''। इसीलिए मैं अक्सर
वसंत ऋतु के आगमन पर अपने मामा के घर अवश्य जाता हूं, और मेरी प्यारी मामी का कहना है कि तुम्हारा आगमन यानी कि वसंत का आगमन।
''यहां भगवान भास्कर अपनी लालिमा को बिखेर कर बाट को स्पष्ट करते हैं और छोटे भाई पवन बहन फसल की खुशबू को साथ में समेटे हुए बाट को पात रूपी आभूषण से तैयार कर नववधू रूप देकर किसान के लिए आंख बिछाए बेसब्री से इंतजार करती हैं''। 
दोपहर के समय मंद मीठी हवा चलती रहती है। 
और ये मीठी हवा बचपन से लथपथ बच्चों के सर को सहलाकर आगे बढ़ जाती हैं। भगवान भास्कर और भाई पवन और बहन खुशबू का संबंध टूट जाता है, जैसे कि ''चांद का चांदनी रात से'' यह तीनों को गोधुल तक भरत-राम की तरह मिलाप अब फिर से करेंगे। और यही बिछडन के कारण ''किसान भाइयों का पेट अंगूर से किशमिश हो जाता है और इसे पुनः अंगूर बनाने के लिए, हरी चूड़ियां खनक ती हुई पकवान युक्त थाल किसान भाइयों के पेट तक पहुंचता है''। 
कुछ अवधि और किसान भाई श्रम करते हैं। उसके बाद धरती मां जो ढाढस देती है उसमें किसान जन खुश होकर त्यौहार का आयोजन करते हैं और यह त्यौहार एक गांव स्तर पर मनाया जाता है इस त्यौहार में सभी घरों से थोड़ा-थोड़ा अनाज आता है और सात प्रकार के सब्जी इकट्ठा करते हैं इस दिवस बच्चे नए-नए कपड़े पहनते हैं, और माथे पर बहन के द्वारा हरे रंग का टीका लगाया जाता है और महिलाएं हरी-हरी चूड़ियां और नए-नए कपड़े पहन कर घर के बाहर का काम संभालती हैं इसके बाद गांव में किसी एक स्थान पर बैठकर अपने मनोरंजन के लिए गायन और भजन तथा नृत्य करती हैं। और इधर पुरुष अपने पैतृक पोशाक और हरे रंग का साफा पहन कर रसोई घर में प्रवेश करते हैं। और सामूहिक भंडारा करते हैं। और फिर इसके बाद गोधुल के समय महिलाओं को पुरुष झूला झुलाने ले जाते हैं। इसके बाद सभी एक स्थान पर बैठकर अपने बेटी के द्वारा परोसा गया भोजन का सेवन करके एक नए उल्लास के साथ नए योजना का श्रीगणेश करते हैं। और इस संकल्प के साथ इस त्यौहार का अंत होता है।
और फिर जब मई जून का महीना आता है इधर कुछ दिवस भगवान भास्कर आग बबूला हो लेते हैं इन दिनों। रेत धूप से चमचमाती हुई प्रतीत होती है, रेत पर एक कदम भी चलना भारी हो जाता है इसके बावजूद भी कुछ गोवाला अपने गोवालो के साथ नदी के तट पर दलील से बातें कर रहे थे।
भाई मैं तो ठंडी छाया की छांव में बैठकर फलों के राजा के साथ चुंबन कर रहा था। फलों के राजा पर विजय प्राप्त करते-करते जून का अंत हो जाता है। 
और फिर वृक्षों को झकझोर ते हुए हवा का झोंका
 आता है और पंछीयो का पंख साध कर रख देता है और फिर प्राकृत मां के गोद को हरियाली करने के लिए पहली वर्षा का शुरुआत होता हैं, वर्षा के बाद सारा वातावरण साफ हो जाता है ''सब की कहानी शुरू हो जाती है संदेशों का आदान-प्रदान होने लगता है, पछिया अपने-अपने घोसले से निकलकर अपने पंख फड़फड़ाते हैं और बदन का सारा पानी झड़ते हैं और एक दूसरे का गात साफ करते हैं और फिर चहचहा कर एक झुंड में एक वृक्ष से दूसरे वृक्ष पर जाती हैं जैसे कि वह किसी का प्रेम संदेशा लिए फिर रही है। और कुछ चिड़िया अपने बच्चे को आसमान के पार इंद्रधनुष की सैर करा रही हैं और फिर तभी अचानक एक काला बादल आता है, और शाम सा कर देता है। और हल्की-हल्की होकर बारिश शुरू हो जाती है इस वक्त सभी के घरों में पकौड़ी छान रहे होते हैं। इन्हीं बीच बच्चे अपनी मां के नजरों से बच के खुले आसमान में आ जाते हैं।
इन्हीं सभी के बीच एक हस्ट पुष्ट सौरभ किशोर शहर से आने वाली सड़क को खड़े-खड़े ना जाने किस के प्यार के संदेशा का इंतजार कर रहा है। और साथ ही प्राकृत मां का लाल पुष्प लिए बेसब्री  से शहर की ओर निहारे जा रहा है। यह देखकर हमको ऐसालगता है कि अब हमको भी शहर की कहानी पकड़नी चाहिए।

-Rohit Kumar Prajapati  (JNV Shrawasti) 
 Class-9th

https://naturalstory19.blogspot.com/2020/07/a-glimpse-of-nature.html

Covid-19

  Covid-19 एक बहुत बड़ा वायरस है जो हमारे स्वणिम जीवन में प्रवेश करके एक मंच प्राप्त करता है जिरारों वह अपने जैरो कइयों वायररा को बना राकें।...

A Glimpse of Nature