23 july 2017
आज का दिन मेरे जीवन के सबसे कठिनतम दिनों में से एक था। इसी मनहूस दिन में मैं अपने प्राणों से अलग हो गया था। इसी दिन के बाद में मैंने कई आत्मीय और मानवीय भावों को बदलते हुए देखा है।
मैंने बहुत सारे उत्पीड़न को सहते हुए जीवन की "एक नई कसौटी के लिए निश्चल एवं असहाय मन से कदम रखा है" मेरी स्थिति कुछ इस प्रकार से हो गई है जैसे "एक चिड़िया सारी पीड़ाओं को सहकर धूप हो या बरसात या कोई भी प्रतिकूल घड़ियों में भी अपने आप की चिंता न करते हुए एक-एक तिनका जुटाकर अंडे देने के लिए घोंसला बनाती है, और बड़े वात्सल्य भाव से सोचती है कि मैं अपने आने वाले बच्चों को हर प्रकार की तकलीफों से दूर रखूंगी और कुछ ही दिनों बाद एक सर्प अंडों को अपना भोजन बना लेता है और वह बेचारी असहाय चिड़िया अपनी आंखों से उस दुर्घटना द्वारा उत्सर्जित उस पीड़ा को देखती रहती है और सहती है।"
आज इन सभी उत्पीड़नो को याद कर मैं उन पलों को याद करता हूं जो शायद ऐसे हो गए हैं जैसे "एक कमल को अपने पत्ते पर लगे उन शबनम की चाहत या जैसे हंस को सरोवर में मोतियों की चाहत।"
मुझे याद है वह मुझसे हमेशा कहा करती थी कि मेरे साथ भी थोड़ी देर बैठ जाओ मेरे पास भी थोड़ी देर वक्त बिता लो और मैं मूर्ख अभागा उन जीवन के सबसे अच्छे पलों को भी बिताने के लिए कतरा रहा था।
हां मैं,
"अपने मां के बारे में ही बात कर रहा हूं" और आज उन पलों को पाने के लिए ऐसी तड़प ऐसे बेचैनी है जैसे "एक सुगम नदी एक महासागर में मिलने के लिए बेचैन रहती है, और जैसे एक चकोर चंद्रमा के उस शीतल किरण को पाने के लिए बेचैन रहता है, या एक कौवा अपनी प्रशंसा के लिए बेचैन रहता है"
पर मैं शायद जानता हूं कि वह पल मुझे कभी नहीं मिलेगा मैं उस दिन से अनजान था कि मेरे अच्छे समय शायद 'उस पथ पर भटक गए हैं जहां सिर्फ बंजर और कांटो के सिवा कुछ नहीं होगा।'
दिनांक 17 जुलाई 2017
आज तक इस दिन को नहीं भूला मैं बाहर से आया था और मेरी मां अपने बचपन के दिनों को तस्वीर के माध्यम से झांकने की कोशिश कर रही थी जो उनसे बहुत ज्यादा दूर जाने वाली थी शायद उनको पता था मेरा एक सुहाना सफर कुछ दिनों में समाप्त हो जाएगा। मैं उनकी आंखों में वह पीड़ा आंसू के रूप में देखा था लेकिन मैं उनसे कुछ पूछ ना सका था और मैंने इस बात को हंसकर टाल दिया वह मेरी उनसे आखिरी वार्तालाप थी। आज 3 साल का एक कठिन सफर बीत चुका है मुझे जीवन एवं अपनों का एक अलग नजरिया देखने को मिला है मैंने इन 3 सालों में लालच स्वार्थ, दिखावा, प्रेम, को भलीभांति समझ लिया है। मुझे पता नहीं कि जीवन के कौन सा रहस्य को जानने का अवसर प्राप्त होने वाला है। सच में मां ईश्वर का दिया हुआ अनमोल तोहफा है यह वह तोहफा जिसकी कीमत पास ना होने पर सहज ही पता लगाया जा सकता है आज मुझे बहुत सारे उत्पीड़नो को अपने हृदय में अकेलेपन के रूप में बसाना पड़ा है जो कि शायद अगर वह होती तो ना करना पड़ता है। आज मैं सभी यादों को अपने खाली समय में सहेजने की कोशिश कर रहा हूं मैं सिर्फ इतनी प्रार्थना करना चाहूंगा कि "सौभाग्य है जिसके पास मां है"
क्योंकि,
उनका प्रेम जीवन का आधार है,
जीवन का सार है,
स्वर्ग रुपी संसार है,
अपार ममता का भंडार है।
उनका प्रेम है जो मानव को मानवता का आकार देती है।
Mother's love is such that it can not be forgotten even by forgetting.
ReplyDeletebhut achha likha hai
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