कक्षा 11 का पहला दिन और पहली क्लास। इस कक्षा में सभी बच्चों के मन में प्रसन्नता की लहर उठ रही है जैसे "कि वसंत ऋतु में पीले सागर में हवा की लहर उठ रही हो।" ये प्रसन्नता का कारण है कि कक्षा 10 पास कर चुके हैं, सभी बच्चे आपस में इस सफलता के बारे में बात-चीत कर रहे हैं, कि किस तरह पढ़ाई करके अपनी सफलता प्राप्त किए हैं।
जैसा की विधि का विधान है कि कक्षा के सभी टॉपरो एक Group बना कर चलते हैं और इस कक्षा के टावरों का Group है जिसमें प्रभास, वैभव, और प्रसून हैं।
और इस टॉपरो के Group में कुछ इस प्रकार की बातचीत चल रही है जिससे यह पता चलता है कि ये लोग अपने जीवन को कोई और मार्ग पर धकेलने की योजना बना रहे हैं इस Group में प्रत्येक बच्चा अपना विचार इन सबके सम्मुख प्रस्तुत करते हैं। अभी तक इस Group में तो मजाक मस्ती चल रही थी।
तभी अचानक प्रभास इस Group को एक नए मोड़ देते हुए बोला- यार हम लोग काफी ज्यादा पढ़ाई किए हैं और बहुत कड़ी मेहनत से इस मुकाम पर पहुंचे हैं। और अपने विद्यालय का नाम रोशन किए हैं।
वैभव ने सहमति जताते हुए कहा- हां यार तुम सही कह रहे हो भाई, हम लोग तो पढ़ाई में तो इतना खो गए थे जैसे कि "कोई पक्षी सारी दुनिया को भुला कर पुष्प के मकरंद रस चूसने में व्यस्त हो, ठीक इसी प्रकार हम लोग पढ़ाई किए थे।"
तभी अचानक प्रसून वैभव की अगली बात रोक कर खिंचाई करते हुए हास्य रस को छिड़ककर बोला- भाई, तुम तो हिंदी में अपना झंडा गाड़ दिया पर हम लोगों को अपना हिंदी वाला झंडा मत दिखाओ। और फिर खुद हंसते हुए बोला- भाई ये सब तो सही हैं लेकिन यार हम लोग तो अपना जीवन तो पूरा दमघोटू बना कर रख दिए हैं। यार मेरी मानो तो कुछ मजाक - मस्ती हो जाए क्योंकि First Year is Rest Year.
प्रसून की बात खत्म होते ही प्रभास झट से सीट पर हाथ पटक कर क्लास के सभी बच्चों का ध्यान आकर्षित करते हुए बोला- भाई, Rest Year कुछ मजाक - मस्ती। फिर अगले पल अपनी आवाज को सीमित करते हुए बोला भाई कुछ अलग मजाक मस्ती करनी हो तो हमसे मिलो।
वैभव थोड़ा हंसमुख सा होकर बोला- भाई, तू ज्यादा भोकाल मत दिखा।
प्रभास- अच्छा ठीक है।
ये बताओ कि मस्ती किस प्रकार का हो जैसे कि घूमने टहलने, स्कूल बंक मारना, दारु - शराब, गोमती-सिगरेट, पान-पुकार किस तरह का चाहिए हमारे पास सब है।
वैभव हंसते हुए बोला- यार, यार तू तो होटल की मीनू कार्ड की तरह शुरू हो गया यार कुछ ऐसा बताओ जिसमें हम लोगों को कहीं जाना ना पड़े।
वैभव सब को संभालते हुए बोला- यार ऐसी परिस्थिति में दारु - शराब एवं सिगरेट जैसी नशीली पदार्थ हमारे सेहत के लिए बहुत हानिकारक होगा। और हां यार हम लोग तो ये भी पढ़े थे कि दारु शराब हमारे सेहत के लिए हानिकारक होता है यहां तक कि जानलेवा भी होता है, इसका क्या होगा।
प्रभास- भक्क पगलागए हो का बे,
हमारे उधर तो बहुत से लोग इन सब का सेवन करते हैं और उनको अभी तक कुछ नहीं हुआ और तो और वह अपना मस्त जीवन जीते हैं। और उनको ना कोई चीज की टेंशन और ना ही किसी चीज की रोकथाम जब चाहे जहां चाहे घूमते टहलते हैं।
प्रसून- भाई, हम लोगों से शराब-वराब नहीं पी जाएगा।
प्रभास- अबे यार, शराब कौन पीने को बोल रहा है हम लोग के पास और भी विकल्प है ना। और यह आखिरी ऑप्शन है सिगरेट, क्या बोलते हैं।
वैभव- यार प्रभास ये बताओ कि तुम इन सब के बारे में इतनी जानकारी कैसे पाए और हां सिगरेट कहां से लाओगे?
प्रभास- देख भाई, हमारे घर के आस-पास बहुत से लोग ऐसे हैं जो इन सब का सेवन करते हैं और मैं अपने घर के बालकनी से इन सब को सेवन करते हुए देखता हूं। इसीलिए मैं इन सब के बारे में जानता हूं और रही बात सिगरेट की, सिगरेट तो हमारे पिताजी खुद पीते हैं।
Group के सभी जन सहमति जताते हुए एक स्वर में बोलते हैं Chal Ok Done. फिर क्या फिर क्या होना था अगले दिन क्लास में 3 सिगरेट लाया गया और फिर Interval में Group के तीनो लोग Toilet Room के पीछे अपने जीवन को एक मोड़ दिए। इस मोड़ के आगे तो कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था ऐसा लग रहा था कि सीधा खाई है। और Group के सभी सदस्य इसी रास्ते पर अपना रुख मोड़ दिया।
1 सप्ताह चलने के बाद ये अपना यूं ही बढ़ाते गए और कक्षा के सभी विद्यार्थियों से धीरे-धीरे अपना नाता तोड़ते गए।
एक पखवारे के बाद कक्षा में एक नया विद्यार्थी दाखिला लिया जो अपने विद्यालय का टॉपर था और साथ ही साथ बहुत अनुशासित बच्चा था। इसके माता-पिता ने कहा था कि "सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना और अच्छे लोगों के साथ उठना बैठना।
"पहली ही क्लास में बच्चे का Introduction हुआ सारे कक्षा वालों को पता चल गया कि ये अपने विद्यालय का टॉपर था। फिर इसने कक्षा के सभी छात्रों से हाथ मिलाकर सबका नाम पूछा और फिर माता-पिता के अनुसार टॉपरों का Group join कर लिया जो अब तक बिगड़ चुका था और कुछ ही दिनों में Group के साथ पूरा हिल मिल गया।
इस Group के नए मेंबर सौरभ ने इन सबको सिगरेट पीते हुए देखा तो इन सब को समझाने लगा और बोला- भाई, सिगरेट पीना अच्छी बात नहीं है, "सिगरेट को तुम लोग नहीं पी रहे बल्कि वह तुमको पी रहा" और यार तुम लोग तो पढ़े-लिखे हो इस डिब्बे पर साफ-साफ लिखा है कि सिगरेट जानलेवा है इसके बावजूद भी।
तभी प्रभास सिगरेट का धुआं बाहर निकालते हुए बोला- अबे चुप, पोगा पंडित। तुमको नहीं पीना हो तो तुम मत पियो।
ऐसा दो-तीन दिन चलता रहा और फिर अगले दिन Group के लोग सौरभ को सिगरेट टेस्ट करने के लिए बोले पर सौरभ ने मना कर दिया। ऐसा 1 सप्ताह तक चलता रहा और फिर अंत में सौरभ भी खाई वाले मोड की तरफ अपना रुख मोड़ दिया।
फिर क्या सौरभ के लिए भी एक सिगरेट आने लगी। फिर ऐसे करते-करते हैं इस Group को सिगरेट का लत लग गया।
अब ये लोग सिगरेट के बिना नहीं रह सकते है। अपने परिवार और स्कूल वालों से चुप-चुप कर पीते है। और तो और इन्होंने एक स्थान भी चुन लिया है और जब भी पीना हो तो एक ही कॉल में वहां मिलते है। अब तो सौरभ भी बड़े चाव से सिगरेट का धुआं लेता है इस अप्रिय गंध अब उसको प्रिय लगने लगी है, और अब Group का मांग हुआ कि सिगरेट से ऊपर चलते हैं शराब पर। Group के सभी सदस्यों का अनुमति मिलने में एक महीना लग गया। शराब की लत लगते ही ये सब लोग अपने परिवार को भ्रम में रखने लगे। पढ़ाई की बोली देखकर पूरी रात-रात तक गायब रहते थे।
और जब माता-पिता पूछते बेटा- तुम्हारी आंखें लाल क्यों हो गई है?
बेटा- पूरी रात पढ़ाई करने के कारण ये ऐसा हो गया है।
अब तो इस Group की स्थिति इस प्रकार हो गई है जैसे कि "हीरे का खान कोयले में बदल गया हो"
"पहले तो ये लोग क्लास के शान मान माने जाते थे, लेकिन अब तो दारु सिगरेट का शान बढ़ा रहे हैं।।
पहले तो क्लास के पहली सीट पर मिलते थे, लेकिन अब तो कई दिनों तक अपना चेहरा नहीं दिखाते हैं।।
पहले तो ये लोग Class, Library, Lab इन सब स्थानों पर मिलते थे, लेकिन अब गली, नुक्कड़, अंग्रेजी शराब पर मिलते हैं।।
इन बच्चों कब पहले भारत देश इंतजार कर रहा था, लेकिन अब पुलिस कर रही है।।"
ऐसे ही किसी तरह यह खबर हवा में उड़ते-उड़ते हुए सौरभ के पापा के पास पहुंचा। और सौरभ के पापा गुंडों को पालने वाले आदमी थे। यह खबर सुनते ही, वो सोग के सागर में डूब गए। सोग के सागर से बाहर आने के बाद, Group के सदस्यों के सभी घरों में यह खबर पहुंचाई गई।
फिर क्या जब प्रभास वैभव प्रसून और सौरभ को पता चला तो ये लोगों ने शराब को चुनते हुए शहर को छोड़ने का निर्णय किया। और इसी रात को यह लोग रात का अंतिम खचाड़ा बस पकड़ लिए। बस में सीट ना होने के कारण बस ड्राइवर ने अपने पास इंजन वाले सीट पर बैठा लिया जिसके चलते ये लोग बस ड्राइवर से दोस्ती कर ली और दोस्ती-यारी मे उनको पिला दिया।
इधर इन चारों के परिवार वाले बेचैन सा होकर इन सब को ढूंढने में लगे हुए हैं, जैसे कि "किसी पक्षी का अंडा सर्प अपना भोजन बना लिया हो और यह पक्षी इधर-उधर भटक कर उसके वियोग में मर रहे है।
इन सभी के घरों का एक ही हाल है घर के बाहर जब भी कोई आता है तो यह लगता है कि मेरा बेटा आया है।
और फिर तभी अचानक मेरा छोटा भाई T.V. खोलता है और गलती से News Channel लगा देता है और इसी News के साथ हम चारों के परिवार की उम्मीद भी टूट जाती है।
bahut achha hai bhai i like this.
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