Saturday, 22 August 2020

आत्मनिर्भर भारत

जैसा कि शब्द से पता चलता है कि आत्मनिर्भर भारत यानी कि भारत अपने देश पर ही निर्भर हो। उसे किसी और देश पर निर्भर ना होना पड़े।

"अगर कोई जीव जंतु या प्राणी या फिर कोई देश किसी और पर निर्भर होता है तो उसकी दशा एक किसी वृक्ष पर आश्रित अमरबेल की तरह होती है, अगर हमें इस वृक्ष को किसी कारणवश काटना पड़े तो अमरबेल की लीला वहीं पर समाप्त हो जाएगी।"

हमारा देश एक अमरबेल नहीं बल्कि एक विशाल वृक्ष बनेगा और एक विशाल वृक्ष आत्मनिर्भर होता है। एक विशाल वृक्ष अपनी मूल जड़ पर निर्भर होता है और वह दूसरों की मदद लेने के बजाय अपने अंदर छिपी शक्तियों को बढ़ाता है और उसके पास जो चीज होती है उसका सदुपयोग करता है।

ठीक इसी प्रकार हमारे देश को करना चाहिए।

हमारे देश का मूल जड़ भारत देश के नन्हे-मुन्ने बच्चे हैं सबसे पहले इन बच्चों को अपने कर्तव्यों को पालन करने योग्य बनाना होगा और इनको सही और गलत मार्ग को पहचानने के योग्य बनाना होगा, और यह तभी संभव होगा जब उनको उचित शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हो।और यह अवसर तभी प्राप्त होगा जब हमारे शिक्षक की भावना यह होनी चाहिए कि "एक मोमबत्ती अपने आपको न्योछावर कर के अंधेरे को दूर भगा ती है ठीक इसी प्रकार एक शिक्षक अपने आपको न्योछावर करके अशिक्षा को दूर भगाने की भावना रखें

भारत देश के नवयुवक की शक्ति को व्यर्थ करने से अच्छा है कि इन शक्तियों का सदुपयोग करके देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ाएं। और इन युवा शक्ति का सदुपयोग तभी होगा जब भारत देश के युवाओं के शक्तियों का सम्मान हो और, भारत देश के युवाओं को यह अवसर अवश्य मिलना चाहिए की वह अपने हुनर को प्रदर्शित करने का एक उचित स्थान मिले और उनके इस हुनर का सम्मान हो तभी हमारा देश आत्मनिर्भर बनेगा। आत्मनिर्भरता को बनाएं रखने में हमारे देश के युवाओं का यह कर्तव्य बनता है कि वह निस्वार्थ कर्म करें और सभी के प्रति सकारात्मक विचार रखे। मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूं की अगर हमारे देश के युवा इन कर्तव्यों का पालन करें तो भारत देश को आत्मनिर्भर बनने से संसार की कोई शक्ति नहीं रोक सकती।

भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमको कोई नई शक्ति की आवश्यकता नहीं है, बस हमारे भारत देश के वासियों की ऊर्जा और हुनर का सम्मान करते हुए सकारात्मक दिशा की ओर लगाना होगा और इन सब को आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक होना होगा।

हमारे भारत देश के कई महान-महान विचारक अपने कर्म और विचार को बिखेर कर अमर हो गए हैं। बस अब जरूरत है तो इन को अमल करने की, मैं अपने निबंध के माध्यम से यह कहना चाहूंगा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमको निचले पायदान से शुरू करना होगा, सबसे पहले हम को आत्मनिर्भर की मानसिकता को बनाकर निस्वार्थ अपने कर्म और कर्तव्य का पालन करते हुए देश के हित में कार्य करें तभी हमारा भारत देश आत्मनिर्भर बनेगा"


 -Rohit Kumar Prajapati  (JNV Shrawasti) 

 Class-9th  

 


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