Friday, 23 October 2020

Covid-19

 Covid-19 एक बहुत बड़ा वायरस है जो हमारे स्वणिम जीवन में प्रवेश करके एक मंच प्राप्त करता है जिरारों वह अपने जैरो कइयों वायररा को बना राकें। और इस मंच का शिकार हम तभी होते हैं जब हम दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करते हैं।


HEAD OF COVID-19-   कहाँ Covid मंच दिख रहा है,

COVID EMPLOY-         Yes sir, वैसे तो नहीं लेकिन हम लोगों का मेंबर आलस कार्य कर रहा है मंच बनाने में 

HEAD OF COVID-19-   उरा व्यक्ति का Inheritance Data निकालो ओर देखो कि Diabetes और heart जैसी कोई बीमारी हे क्या?

COVID EMPLOY -         sorry sir Diabetes, है पर ओ अपना Immumity System बहुत Strong किये हुआ है।

HEAD OF COVID-19-    Ok कोई नहीं, एक काम करो कि अपना ज्यादा से ज्यादा EMPLOY इस व्यक्ति के इर्द गिर्द भेज दो,

COVID EMPLOY-          Yes sir, हमने भेज दिया है दरवाजे के हैंडल पर और फर्श और हां साथ में कामवाली के हाथ उसके घर में डिलीवर कर दूंगा। ok sir,

HEAD OF COVID-19-   Work of covid Graph हमको ईमेल करो जल्दी!

COVID EMPLOY-           Ok sir कर दिया लेकिन एक Problem  है सर हम अपनाऔर  इन मनुष्य के द्वारा बनाए गए ग्राफ को चेक किया था सर दोनों में डिफरेंस आ रहा है यह लोग कम दिखा रहे हैं।

HEAD OF COVID-19-   अन्छ। ठीक है तुम इस पर ध्यान न दे क्योकि ये Politics है | ok

COVID EMPLOY-        सर वो Diabetes वाले case पर हम लोग बात किए थे। उसके पास हमारा वायरस पहुंच गया था, लेकिन हुआ यूं कि उन्होंने Sanitize करके मार दिया।

HEAD OF COVID-19- परेशान होने की जरूरत नहीं है अगला टारगेट बनाओ

COVID EMPLOY-        ok sir Hello sir sir!!! अभी अभी एक नोटिफिकेशन आया है कि हमारी टीम ने एक मनुष्य के ऊपर अटैक कर लिया है।

HEAD OF COVID-19-  यह Case इमको हैंडोवर करो.

COVID EMPLOY-        ok sir मैं इस मनुष्य New data and last dara आपको ईगेल कर रहा हूं

HEAD OF COVID-19  एक कॉपी तुम भी रखना क्योंकि केरा हैंडोवर हुआ है  work तुम ही लोगों को करना है, उरा मनुष्य के Body के अंदर एक टीम बनाओ और हमारे मार्गदर्शन के अनुसार उराको मैनेज करो।

COVID EMPLOY -     ok sir

HEAD OF COVID-19- Body के अंदर virus का multiplication शुरू करो।

COVID EMPLOY-      Ok sir, शुरू कर दिया,

HEAD OF COVID-19- इसके बाद में Covid का Sintam भेजना।

COVID EMPLOY-         sir ये क्यों इससे तो वह अपना इलाज कराने लगेगा!

HEAD OF COVID-19-   नहीं इससे उसके मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव पड़ेगा और उसको समाज से अलग कर दिया जाएगा और हो सकता है कि उसको Covid Depression या फिर Tension से उसकी मौत हो जाए।

COVID EMPLOY-         ठीक है simtam में क्या भेजूं?

HEAD OF COVID-19- सीने में जकड़न कर दो और आवाज़ में खांसी।, अच्छा ये बताओ की हेड में अटेक कर पाओगे?

COVID EMPLOY-        No sir, इसके लिए हम को थोड़ा सा रुकना पड़ेगा, सर ये क्या है!!!!!  इस मनुष्य को तो बड़े-बड़े साइंटिस्ट और डॉक्टर को सौंप दिया गया है।

HEAD OF COVID-19- लगता है कोई बड़ा आदमी है , अच्छा एक काम करो जल्दी से मल्टीप्लिकेशन तेज करो और टेस्ट रिसेप्टर और इस मेल का रिसेप्टर ऑफ करो।

COVIDEMPLOY-        ठीक है सर,  ठीक है,

HEAD OF COVID-19- अच्छा विजय प्राप्त हुआ कि नहीं?

COVIDEMPLOY-         No sir, बल्कि हम में से एक को निकाल कर ले गए Lab Test करने के लिए।

HEAD OF COVID-19- अच्छा यह बताओ कि उस के पास हम लोगों का Data था? 

COVID EMPLOY-       जाहिर सी बात है हम लोगों के साथ काम कर रहा था और उस के पास भी तो D NA है न सर, तो उसके पास भी सब Data होगा,

HEAD OF COVID-19- अरे!!! अब हम लोग मारे जाएंगे क्योंकि वे लोग उससे  Covid का Vaccin बनाएंगे।

COVID EMPLOY-      लेकिन सर हम उस मनुष्य पर विजय प्राप्त कर लिए हैं।

HEAD OF COVID-19-   अब कोई........... फायदा नहीं

                      सभी covid Branch और Covid office में Alert जारी कर दो की Covid Vaccine is coming............................................                                                                                               

       ||और एक बार फिर भारत के बड़े-बड़े डिग्री धारक लोगों ने इस महामारी से दुनिया को बचाया||

                  || तो भैया हाथ धोते रहो नहीं तो अपने जिंदगी से हाथ धो बैठोगे ||


-Rohit Kumar Prajapati  (JNV Shrawasti) 

 Class-9th 

Saturday, 22 August 2020

आत्मनिर्भर भारत

जैसा कि शब्द से पता चलता है कि आत्मनिर्भर भारत यानी कि भारत अपने देश पर ही निर्भर हो। उसे किसी और देश पर निर्भर ना होना पड़े।

"अगर कोई जीव जंतु या प्राणी या फिर कोई देश किसी और पर निर्भर होता है तो उसकी दशा एक किसी वृक्ष पर आश्रित अमरबेल की तरह होती है, अगर हमें इस वृक्ष को किसी कारणवश काटना पड़े तो अमरबेल की लीला वहीं पर समाप्त हो जाएगी।"

हमारा देश एक अमरबेल नहीं बल्कि एक विशाल वृक्ष बनेगा और एक विशाल वृक्ष आत्मनिर्भर होता है। एक विशाल वृक्ष अपनी मूल जड़ पर निर्भर होता है और वह दूसरों की मदद लेने के बजाय अपने अंदर छिपी शक्तियों को बढ़ाता है और उसके पास जो चीज होती है उसका सदुपयोग करता है।

ठीक इसी प्रकार हमारे देश को करना चाहिए।

हमारे देश का मूल जड़ भारत देश के नन्हे-मुन्ने बच्चे हैं सबसे पहले इन बच्चों को अपने कर्तव्यों को पालन करने योग्य बनाना होगा और इनको सही और गलत मार्ग को पहचानने के योग्य बनाना होगा, और यह तभी संभव होगा जब उनको उचित शिक्षा प्राप्त करने का अवसर प्राप्त हो।और यह अवसर तभी प्राप्त होगा जब हमारे शिक्षक की भावना यह होनी चाहिए कि "एक मोमबत्ती अपने आपको न्योछावर कर के अंधेरे को दूर भगा ती है ठीक इसी प्रकार एक शिक्षक अपने आपको न्योछावर करके अशिक्षा को दूर भगाने की भावना रखें

भारत देश के नवयुवक की शक्ति को व्यर्थ करने से अच्छा है कि इन शक्तियों का सदुपयोग करके देश की आत्मनिर्भरता को बढ़ाएं। और इन युवा शक्ति का सदुपयोग तभी होगा जब भारत देश के युवाओं के शक्तियों का सम्मान हो और, भारत देश के युवाओं को यह अवसर अवश्य मिलना चाहिए की वह अपने हुनर को प्रदर्शित करने का एक उचित स्थान मिले और उनके इस हुनर का सम्मान हो तभी हमारा देश आत्मनिर्भर बनेगा। आत्मनिर्भरता को बनाएं रखने में हमारे देश के युवाओं का यह कर्तव्य बनता है कि वह निस्वार्थ कर्म करें और सभी के प्रति सकारात्मक विचार रखे। मैं पूरे दावे के साथ कह सकता हूं की अगर हमारे देश के युवा इन कर्तव्यों का पालन करें तो भारत देश को आत्मनिर्भर बनने से संसार की कोई शक्ति नहीं रोक सकती।

भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमको कोई नई शक्ति की आवश्यकता नहीं है, बस हमारे भारत देश के वासियों की ऊर्जा और हुनर का सम्मान करते हुए सकारात्मक दिशा की ओर लगाना होगा और इन सब को आत्मनिर्भरता के प्रति जागरूक होना होगा।

हमारे भारत देश के कई महान-महान विचारक अपने कर्म और विचार को बिखेर कर अमर हो गए हैं। बस अब जरूरत है तो इन को अमल करने की, मैं अपने निबंध के माध्यम से यह कहना चाहूंगा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए हमको निचले पायदान से शुरू करना होगा, सबसे पहले हम को आत्मनिर्भर की मानसिकता को बनाकर निस्वार्थ अपने कर्म और कर्तव्य का पालन करते हुए देश के हित में कार्य करें तभी हमारा भारत देश आत्मनिर्भर बनेगा"


 -Rohit Kumar Prajapati  (JNV Shrawasti) 

 Class-9th  

 


Tuesday, 28 July 2020

Substance Abuse

कक्षा 11 का पहला दिन और पहली क्लास। इस कक्षा में सभी बच्चों के मन में प्रसन्नता की लहर उठ रही है जैसे "कि वसंत ऋतु में पीले सागर में हवा की लहर उठ रही हो।" ये प्रसन्नता का कारण है कि कक्षा 10 पास कर चुके हैं, सभी बच्चे आपस में इस सफलता के बारे में बात-चीत कर रहे हैं, कि किस तरह पढ़ाई करके अपनी सफलता प्राप्त किए हैं।

जैसा की विधि का विधान है कि कक्षा के सभी टॉपरो एक Group बना कर चलते हैं और इस कक्षा के टावरों का Group है जिसमें प्रभास, वैभव, और प्रसून हैं।

और इस टॉपरो के Group में कुछ इस प्रकार की बातचीत चल रही है जिससे यह पता चलता है कि ये लोग अपने जीवन को कोई और मार्ग पर धकेलने की योजना बना रहे हैं इस Group में प्रत्येक बच्चा अपना विचार इन सबके सम्मुख प्रस्तुत करते हैं। अभी तक इस Group में तो मजाक मस्ती चल रही थी।     

तभी अचानक प्रभास इस Group को एक नए मोड़ देते हुए बोला-  यार हम लोग काफी ज्यादा पढ़ाई किए हैं और बहुत कड़ी मेहनत से इस मुकाम पर पहुंचे हैं। और अपने विद्यालय का नाम रोशन किए हैं।

वैभव ने सहमति जताते हुए कहा-  हां यार तुम सही कह रहे हो भाई, हम लोग तो पढ़ाई में तो इतना खो गए थे जैसे कि "कोई पक्षी सारी दुनिया को भुला कर पुष्प के मकरंद रस चूसने में व्यस्त हो, ठीक इसी प्रकार हम लोग पढ़ाई किए थे।" 

तभी अचानक प्रसून वैभव की अगली बात रोक कर खिंचाई करते हुए हास्य रस को छिड़ककर बोला-  भाई, तुम तो हिंदी में अपना झंडा गाड़ दिया पर हम लोगों को अपना हिंदी वाला झंडा मत दिखाओ। और फिर खुद हंसते हुए बोला-  भाई ये सब तो सही हैं लेकिन यार हम लोग तो अपना जीवन तो पूरा दमघोटू बना कर रख दिए हैं। यार मेरी मानो तो कुछ मजाक - मस्ती हो जाए क्योंकि First Year is Rest Year.

प्रसून की बात खत्म होते ही प्रभास झट से सीट पर हाथ पटक कर क्लास के सभी बच्चों का ध्यान आकर्षित करते हुए बोला-  भाई, Rest Year कुछ मजाक -  मस्ती। फिर अगले पल अपनी आवाज को सीमित करते हुए बोला भाई कुछ अलग मजाक मस्ती करनी हो तो हमसे मिलो।

वैभव थोड़ा हंसमुख सा होकर बोला-  भाई, तू ज्यादा भोकाल मत दिखा।

प्रभास-  अच्छा ठीक है।

ये बताओ कि मस्ती किस प्रकार का हो जैसे कि घूमने टहलने, स्कूल बंक मारना, दारु - शराब, गोमती-सिगरेट, पान-पुकार किस तरह का चाहिए हमारे पास सब है।

वैभव हंसते हुए बोला-  यार, यार तू तो होटल की मीनू कार्ड की तरह शुरू हो गया यार कुछ ऐसा बताओ जिसमें हम लोगों को कहीं जाना ना पड़े।

वैभव सब को संभालते हुए बोला-  यार ऐसी परिस्थिति में दारु - शराब एवं सिगरेट जैसी नशीली पदार्थ हमारे सेहत के लिए बहुत हानिकारक होगा। और हां यार हम लोग तो ये भी पढ़े थे कि दारु शराब हमारे सेहत के लिए हानिकारक होता है यहां तक कि जानलेवा भी होता है, इसका क्या होगा। 

प्रभास-  भक्क पगलागए हो का बे,

हमारे उधर तो बहुत से लोग इन सब का सेवन करते हैं और उनको अभी तक कुछ नहीं हुआ और तो और वह अपना मस्त जीवन जीते हैं। और उनको ना कोई चीज की टेंशन और ना ही किसी चीज की रोकथाम जब चाहे जहां चाहे घूमते टहलते हैं। 

प्रसून-  भाई, हम लोगों से शराब-वराब नहीं पी जाएगा।

प्रभास-  अबे यार, शराब कौन पीने को बोल रहा है हम लोग के पास और भी विकल्प है ना। और यह आखिरी ऑप्शन है सिगरेट, क्या बोलते हैं।

वैभव-  यार प्रभास ये बताओ कि तुम इन सब के बारे में इतनी जानकारी कैसे पाए और हां सिगरेट कहां से लाओगे?

प्रभास-  देख भाई, हमारे घर के आस-पास बहुत से लोग ऐसे हैं जो इन सब का सेवन करते हैं और मैं अपने घर के बालकनी से इन सब को सेवन करते हुए देखता हूं। इसीलिए मैं इन सब के बारे में जानता हूं और रही बात सिगरेट की, सिगरेट तो हमारे पिताजी खुद पीते हैं।

Group के सभी जन सहमति जताते हुए एक स्वर में बोलते हैं Chal Ok Done. फिर क्या फिर क्या होना था अगले दिन क्लास में 3 सिगरेट लाया गया और फिर Interval में Group के तीनो लोग Toilet Room के पीछे अपने जीवन को एक मोड़ दिए। इस मोड़ के आगे तो कुछ दिखाई ही नहीं दे रहा था ऐसा लग रहा था कि सीधा खाई है। और Group के सभी सदस्य इसी रास्ते पर अपना रुख मोड़ दिया।

1 सप्ताह चलने के बाद ये अपना यूं ही बढ़ाते गए और कक्षा के सभी विद्यार्थियों से धीरे-धीरे अपना नाता तोड़ते गए।

एक पखवारे के बाद कक्षा में एक नया विद्यार्थी दाखिला लिया जो अपने विद्यालय का टॉपर था और साथ ही साथ बहुत अनुशासित  बच्चा था। इसके माता-पिता ने कहा था कि "सभी के साथ अच्छा व्यवहार करना और अच्छे लोगों के साथ उठना बैठना।

"पहली ही क्लास में बच्चे का Introduction हुआ सारे कक्षा वालों को पता चल गया कि ये अपने विद्यालय का टॉपर था। फिर इसने कक्षा के सभी छात्रों से हाथ मिलाकर सबका नाम पूछा और फिर माता-पिता के अनुसार टॉपरों का Group join कर लिया जो अब तक बिगड़ चुका था और कुछ ही दिनों में Group के साथ पूरा हिल मिल गया।

इस Group के नए मेंबर सौरभ ने इन सबको सिगरेट पीते हुए देखा तो इन सब को समझाने लगा और बोला-  भाई, सिगरेट पीना अच्छी बात नहीं है, "सिगरेट को तुम लोग नहीं पी रहे बल्कि वह तुमको पी रहा" और यार तुम लोग तो पढ़े-लिखे हो इस डिब्बे पर साफ-साफ लिखा है कि सिगरेट जानलेवा है इसके बावजूद भी।

तभी प्रभास सिगरेट का धुआं बाहर निकालते हुए बोला-  अबे चुप, पोगा पंडित। तुमको नहीं पीना हो तो तुम मत पियो। 

ऐसा दो-तीन दिन चलता रहा और फिर अगले दिन Group के लोग सौरभ को सिगरेट टेस्ट करने के लिए बोले पर सौरभ ने मना कर दिया। ऐसा 1 सप्ताह तक चलता रहा और फिर अंत में सौरभ भी खाई वाले मोड की तरफ अपना रुख मोड़ दिया।

फिर क्या सौरभ के लिए भी एक सिगरेट आने लगी। फिर ऐसे करते-करते हैं इस Group को सिगरेट का लत लग गया।

अब ये लोग सिगरेट के बिना नहीं रह सकते है। अपने परिवार और स्कूल वालों से चुप-चुप कर पीते है। और तो और इन्होंने एक स्थान भी चुन लिया है और जब भी पीना हो तो एक ही कॉल में वहां मिलते है। अब तो सौरभ भी बड़े चाव से सिगरेट का धुआं लेता है इस अप्रिय गंध अब उसको प्रिय लगने लगी है, और अब Group का मांग हुआ कि सिगरेट से ऊपर चलते हैं शराब पर। Group के सभी सदस्यों का अनुमति मिलने में एक महीना लग गया। शराब की लत लगते ही ये सब लोग अपने परिवार को भ्रम में रखने लगे। पढ़ाई की बोली देखकर पूरी रात-रात तक गायब रहते थे।

और जब माता-पिता पूछते बेटा-  तुम्हारी आंखें लाल क्यों हो गई है?

बेटा-  पूरी रात पढ़ाई करने के कारण ये ऐसा हो गया है।

अब तो इस Group की स्थिति इस प्रकार हो गई है जैसे कि "हीरे का खान कोयले में बदल गया हो"

"पहले तो ये लोग क्लास के शान मान माने जाते थे, लेकिन अब तो दारु सिगरेट का शान बढ़ा रहे हैं।।

पहले तो क्लास के पहली सीट पर मिलते थे, लेकिन अब तो कई दिनों तक अपना चेहरा नहीं दिखाते हैं।।

पहले तो ये लोग Class, Library, Lab  इन सब स्थानों पर मिलते थे, लेकिन अब गली, नुक्कड़, अंग्रेजी शराब पर मिलते हैं।।

इन बच्चों कब पहले भारत देश इंतजार कर रहा था, लेकिन अब पुलिस कर रही है।।"

ऐसे ही किसी तरह यह खबर हवा में उड़ते-उड़ते हुए सौरभ के पापा के पास पहुंचा। और सौरभ के पापा गुंडों को पालने वाले आदमी थे। यह खबर सुनते ही, वो सोग के सागर में डूब गए। सोग के सागर से बाहर आने के बाद, Group के सदस्यों के सभी घरों में यह खबर पहुंचाई गई।

फिर क्या जब प्रभास वैभव प्रसून और सौरभ को पता चला तो ये लोगों ने शराब को चुनते हुए शहर को छोड़ने का निर्णय किया। और इसी रात को यह लोग रात का अंतिम खचाड़ा बस पकड़ लिए। बस में सीट ना होने के कारण बस ड्राइवर ने अपने पास इंजन वाले सीट पर बैठा लिया जिसके चलते ये लोग बस ड्राइवर से दोस्ती कर ली और दोस्ती-यारी मे उनको पिला दिया।

इधर इन चारों के परिवार वाले बेचैन सा होकर इन सब को ढूंढने में लगे हुए हैं, जैसे कि "किसी पक्षी का अंडा सर्प अपना भोजन बना लिया हो और यह पक्षी इधर-उधर भटक कर उसके वियोग में मर रहे है।

इन सभी के घरों का एक ही हाल है घर के बाहर जब भी कोई आता है तो यह लगता है कि मेरा बेटा आया है।

और फिर तभी अचानक मेरा छोटा भाई T.V. खोलता है और गलती से News Channel लगा देता है और इसी News के साथ हम चारों के परिवार की उम्मीद भी टूट जाती है।


-Rohit Kumar Prajapati  (JNV Shrawasti) 
 Class-9th

Saturday, 25 July 2020

वक़्त के नोक पर मेरे ह्रदय का तस्वीर

23 july 2017


आज
का दिन मेरे जीवन के सबसे कठिनतम दिनों में से एक था। इसी मनहूस दिन में मैं अपने प्राणों से अलग हो गया था। इसी दिन के बाद में मैंने कई आत्मीय और मानवीय भावों को बदलते हुए देखा है।

मैंने बहुत सारे उत्पीड़न को सहते हुए जीवन की "एक नई कसौटी के लिए निश्चल एवं असहाय मन से कदम रखा है" मेरी स्थिति कुछ इस प्रकार से हो गई है जैसे "एक चिड़िया सारी पीड़ाओं को सहकर धूप हो या बरसात या कोई भी प्रतिकूल घड़ियों में भी अपने आप की चिंता करते हुए एक-एक तिनका जुटाकर अंडे देने के लिए घोंसला बनाती है, और बड़े वात्सल्य भाव से सोचती है कि मैं अपने आने वाले बच्चों को हर प्रकार की तकलीफों से दूर रखूंगी और कुछ ही दिनों बाद एक सर्प अंडों को अपना भोजन बना लेता है और वह बेचारी असहाय चिड़िया अपनी आंखों से उस दुर्घटना द्वारा उत्सर्जित उस पीड़ा को देखती रहती है और सहती है।"

आज इन सभी उत्पीड़नो को याद कर मैं उन पलों को याद करता हूं जो शायद ऐसे हो गए हैं जैसे "एक कमल को अपने पत्ते पर लगे उन शबनम की चाहत या जैसे हंस को सरोवर में मोतियों की चाहत।"

मुझे याद है वह मुझसे हमेशा कहा करती थी कि मेरे साथ भी थोड़ी देर बैठ जाओ मेरे पास भी थोड़ी देर वक्त बिता लो और मैं मूर्ख अभागा उन जीवन के सबसे अच्छे पलों को भी बिताने के लिए कतरा रहा था।

हां मैं,

"अपने मां के बारे में ही बात कर रहा हूं" और आज उन पलों को पाने के लिए ऐसी तड़प ऐसे बेचैनी है जैसे "एक सुगम नदी एक महासागर में मिलने के लिए बेचैन रहती है, और जैसे एक चकोर चंद्रमा के उस शीतल किरण को पाने के लिए बेचैन रहता है, या एक कौवा अपनी प्रशंसा के लिए बेचैन रहता है"

पर मैं शायद जानता हूं कि वह पल मुझे कभी नहीं मिलेगा मैं उस दिन से अनजान था कि मेरे अच्छे समय शायद 'उस पथ पर भटक गए हैं जहां सिर्फ बंजर और कांटो के सिवा कुछ नहीं होगा।'

                               दिनांक 17 जुलाई 2017

आज तक इस दिन को नहीं भूला मैं बाहर से आया था और मेरी मां अपने बचपन के दिनों को तस्वीर के माध्यम से झांकने की कोशिश कर रही थी जो उनसे बहुत ज्यादा दूर जाने वाली थी शायद उनको पता था मेरा एक सुहाना सफर कुछ दिनों में समाप्त हो जाएगा। मैं उनकी आंखों में वह पीड़ा आंसू के रूप में देखा था लेकिन मैं उनसे कुछ पूछ ना सका था और मैंने इस बात को हंसकर टाल दिया वह मेरी उनसे आखिरी वार्तालाप थी। आज 3 साल का एक कठिन सफर बीत चुका है मुझे जीवन एवं अपनों का एक अलग नजरिया देखने को मिला है मैंने इन 3 सालों में लालच स्वार्थ, दिखावा, प्रेम, को भलीभांति समझ लिया है। मुझे पता नहीं कि जीवन के कौन सा रहस्य को जानने का अवसर प्राप्त होने वाला है। सच में मां ईश्वर का दिया हुआ अनमोल तोहफा है यह वह तोहफा जिसकी कीमत पास ना होने पर सहज ही पता लगाया जा सकता है आज मुझे बहुत सारे उत्पीड़नो को अपने हृदय में अकेलेपन के रूप में बसाना पड़ा है जो कि शायद अगर वह होती तो ना करना पड़ता है। आज मैं सभी यादों को अपने खाली समय में सहेजने की कोशिश कर रहा हूं मैं सिर्फ इतनी प्रार्थना करना चाहूंगा कि "सौभाग्य है जिसके पास मां है"

क्योंकि,

                                उनका प्रेम जीवन का आधार है,

                        जीवन का सार है,

                        स्वर्ग रुपी संसार है,

                        अपार ममता का भंडार है।

उनका प्रेम है जो मानव को मानवता का आकार देती है                                    


https://naturalstory19.blogspot.com/2020/07/a-glimpse-of-nature.html

Covid-19

  Covid-19 एक बहुत बड़ा वायरस है जो हमारे स्वणिम जीवन में प्रवेश करके एक मंच प्राप्त करता है जिरारों वह अपने जैरो कइयों वायररा को बना राकें।...

A Glimpse of Nature